हिमाचल विस में गूंजा आउटसोर्स कर्मियों का मुद्दा

मैडीकल कॉलेजों में स्टाफ नर्सों की नियुक्ति आउटसोर्स माध्यम से नहीं की जाएगी : सी.एम. सुक्खू

मुख्यमंत्री ने कहा कि मल्टीटास्क वर्करों की नियुक्ति अलग नीति के तहत होती है और इन कर्मचारियों के नियमित होने का प्रावधान भी है।

By : Just Click National , Sukhwinder Kaur
मैडीकल कॉलेजों में स्टाफ नर्सों की नियुक्ति आउटसोर्स माध्यम से नहीं की जाएगी : सी.एम. सुक्खू

विधानसभा सत्र में बात रखते मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू

शिमला, 26 अगस्त (हि.स.) : हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में प्रश्नकाल के दौरान बुधवार को आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा प्रमुखता गूंजा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऐलान किया कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में आउटसोर्स भर्ती को कम करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैडीकल कॉलेजों में स्टाफ नर्सों की नियुक्ति आउटसोर्स माध्यम से नहीं की जाएगी। नर्सों की भर्ती लिखित परीक्षा के माध्यम से की जाएगी और अगले चार-पांच महीने में सभी मेडिकल कॉलेजों में योग्य नर्सों की तैनाती का लक्ष्य रखा गया है। करसोग के विधायक दीपराज के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान टांडा मेडिकल कॉलेज और आईजीएमसी में आउटसोर्स आधार पर रखे गए कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त करने की व्यवस्था की गई है। ऐसे कर्मचारी जो फिर से काम पर आना चाहते हैं, उन्हें रखने पर सरकार विचार करेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि करीब 600 नर्सों के साक्षात्कार चल रहे हैं। वहीं विधायक दीपराज के मूल सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए फिलहाल कोई नीति निर्धारित नहीं है। उन्होंने बताया कि 13 अक्तूबर 2022 को सरकार ने विभिन्न विभागों, बोर्डों और निगमों में आउटसोर्स आधार पर नियुक्त कर्मचारियों की सेवाएं जारी रखने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों को निरस्त करने और आउटसोर्स आधार पर नियुक्तियां बंद करने को लेकर हिमाचल सरकार के खिलाफ बाल कृष्ण बनाम हिमाचल सरकार नाम से याचिका हाईकोर्ट में विचाराधीन है। दीपराज ने अपने पूरक सवाल में आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाए जाने, शिलाई में करीब 700 लोगों को आउटसोर्स माध्यम से लगाए जाने और करसोग में जलवाहक लगाने के लिए 500 रुपए शुल्क लिए जाने का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आउटसोर्स व्यवस्था पिछली सरकारों के समय से चली आ रही है और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल से भी आउटसोर्स के माध्यम से सेवाएं ली जाती रही हैं। उन्होंने कहा कि कई बार किसी अस्पताल में 40 पदों की सेवाएं स्वीकृत होती हैं, लेकिन 30 कर्मचारियों से ही काम लिया जाता है। उन्होंने इसे गलत बताया और ऐसे मामलों का संज्ञान लेने की बात कही। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने सवाल किया कि सरकार ने चुनाव से पहले आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनाने की बात कही थी, क्या यह नीति तैयार हो गई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने बेरोजगारों को रोजगार देने के बजाय बड़ी संख्या में आउटसोर्स एजेंसियां और ठेकेदार तैयार कर दिए हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि मौजूदा सरकार के करीब पौने चार साल के कार्यकाल में कितनी नई आउटसोर्स एजेंसियां एंपेनल की गई हैं और इनके एंपेनलमेंट की नीति क्या है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि आउटसोर्स कर्मचारी और मल्टीटास्क वर्कर अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। उन्होंने कहा कि मल्टीटास्क वर्करों की नियुक्ति अलग नीति के तहत होती है और इन कर्मचारियों के नियमित होने का प्रावधान भी है।

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