बिहार

थावे दुर्गा मंदिर में पूजा को लेकर भेदभाव! एक ही दिन, एक ही गर्भगृह में मंत्रियों के लिए अलग–अलग नियम क्यों?

नमो नारायण मिश्रा/न्यूज11  भारत

गोपालगंज/डेस्क:   गोपालगंज से इस वक्त एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आ रहा है, जिसने धार्मिक स्थलों पर समानता, सम्मान और नियमों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. आरोप है कि थावे दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान भेदभाव किया गया. यह भेदभाव किसी आम श्रद्धालु के साथ नहीं, बल्कि बिहार सरकार के मंत्री के साथ हुआ. बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक कुमार को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई, जबकि उनके कुछ समय बाद पहुंचे ग्रामीण विकास मंत्री अशोक चौधरी और उनके दामाद, बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद से जुड़े सदस्य सायन कुणाल को न केवल गर्भगृह में प्रवेश मिला, बल्कि विधिवत पूजा भी कराई गई. अब सवाल यह है - एक ही मंदिर, एक ही दिन, एक ही पूजा स्थल पर नियम अलग–अलग क्यों? घटना थावे दुर्गा मंदिर कीe है, जहां पंचायती राज मंत्री दीपक कुमार पूजा-अर्चना के उद्देश्य से पहुंचे थे. मंत्री दीपक कुमार ने मंदिर परिसर में विधिवत पूजा की, लेकिन आरोप है कि मंदिर के गर्भगृह मेंe प्रवेश की अनुमति उन्हें नहीं दी गई. करीब आधे घंटे बाद मंदिर पहुंचे ग्रामीण विकास मंत्री अशोक चौधरी और उनके दामाद सायन कुणाल. आरोप यह भी है कि जैसे ही वे मंदिर पहुंचे, पुजारी और मंदिर न्यास समितिr के पदाधिकारियों ने स्वयं उन्हें गर्भगृह के भीतर ले जाकर पूजा कराई.

इस पूरे घटनाक्रम ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं - क्या मंदिर में प्रवेश के लिए अलग–अलग लोगों के लिए अलग नियम हैं, अगर नियम है कि गर्भगृह में किसी को प्रवेश नहीं मिलता, तो फिर अशोक चौधरी और सायन कुणाल को कैसे अनुमति मिली. क्या यह पद, प्रभाव और न्यास से जुड़े होने का लाभ है. क्या मंदिर प्रशासन और पुजारियों ने समानता के सिद्धांत का उल्लंघन किया? कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि - “मंदिर आस्था का स्थान है, यहां कोई छोटा–बड़ा नहीं होना चाहिए. अगर नियम हैं, तो सभी के लिए समान होने चाहिए.” वहीं कुछ लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या मंदिर न्यास समिति पर राजनीतिक प्रभाव हावी है? फिलहाल मंदिर न्यास समिति और पुजारियों की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है. लेकिन चुप्पी ने संदेह को और गहरा कर दिया है. क्या थावे दुर्गा मंदिर में आस्था से बड़ा पद और प्रभाव हो गया है? क्या गर्भगृह में प्रवेश का पैमाना श्रद्धा नहीं, बल्कि पहचान और पहुंच बन गया है? इस मामले पर सबकी नजर अब मंदिर न्यास समिति और प्रशासन के जवाब पर टिकी है. अगर जवाब नहीं आया, तो यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा विवाद बन सकता है.

यह भी पढ़ें: सीतामढ़ी में पुलिस ने 107 किलोग्राम गांजा के साथ दो तस्करों  को किया गिरफ्तार