हिमाचल प्रदेश में सरकारी लॉटरी दोबारा शुरू करने के प्रस्ताव का विरोध
शिमला, 26 अगस्त (हि.स.) : पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में सरकारी लॉटरी दोबारा शुरू करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर वित्त विभाग की ओर से जारी लॉटरी टैंडर को तत्काल वापस लेने की मांग की है। अनुराग ठाकुर ने अपने पत्र में वित्त विभाग की ओर से जारी ई-टैंडर का जिक्र किया है। इस टैंडर के जरिए ऑनलाइन और ऑफलाइन लॉटरी व्यवस्था के लिए एकमात्र बिक्री एजैंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। ठाकुर ने मुख्यमंत्री से इस प्रस्ताव को पूरी तरह वापस लेने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लॉटरी पर दो दशक से अधिक समय से राजनीतिक सहमति बनी हुई है। उनके अनुसार 1999 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने लॉटरी पर रोक लगाई थी। उस समय लॉटरी के कारण कर्मचारियों, पैंशनरों, मजदूरों और युवाओं पर पड़ रहे असर को इसके पीछे एक प्रमुख कारण बताया गया था। अनुराग ठाकुर ने अपने पत्र में कहा कि बाद में जब हिमाचल में लॉटरी दोबारा शुरू हुई तो 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की कांग्रेस सरकार ने फिर इस पर रोक लगा दी। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह, प्रेम कुमार धूमल और जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली सरकारों ने वित्तीय दबाव के बावजूद लॉटरी पर रोक बनाए रखी। ठाकुर ने इसे हिमाचल के लोगों के अनुभव से बनी लंबे समय की राजनीतिक सहमति बताया। ऑनलाइन लॉटरी को लेकर जताई चिंता : अनुराग ठाकुर ने प्रस्तावित ऑनलाइन लॉटरी व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में हर दिन 12 तक ड्रॉ और साल में तीन बड़े बंपर ड्रॉ का प्रावधान है। उनके अनुसार ऑनलाइन व्यवस्था के कारण लॉटरी सीधे लोगों के मोबाइल फोन और घरों तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि इससे कम और मध्यम आय वाले परिवारों पर अधिक असर पड़ सकता है। ठाकुर ने अपने पत्र में दावा किया कि हिमाचल में पहले भी कई परिवारों ने लॉटरी में अपनी आय, बचत और पैंशन का पैसा गंवाया है और इससे परिवार आर्थिक परेशानी में पहुंचे हैं। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 38 और 47 का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार इन प्रावधानों में राज्य के लोगों के कल्याण और स्वास्थ्य के लिए नुक्सान पहुंचाने वाली गतिविधियों से सुरक्षा की जिम्मेदारी पर जोर दिया गया है। 110010 करोड़ रुपए के कर्ज का दिया हवाला : हिमाचल की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि 2026 में प्रदेश का कर्ज बढ़कर 110010 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है और कर्ज का अनुपात राज्य के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी के 42 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में लॉटरी प्रदेश की वित्तीय समस्या का कोई बड़ा समाधान नहीं हो सकती। ठाकुर के अनुसार प्रस्तावित लॉटरी से सालाना करीब 100 करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान है। उन्होंने केरल की लॉटरी व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि लॉटरी की कुल बिक्री बड़ी होने के बाद भी पुरस्कार राशि, कमीशन, विज्ञापन और प्रशासनिक खर्च निकालने के बाद सरकार को मिलने वाली वास्तविक आय काफी कम हो सकती है। जी.एस.टी. से अतिरिक्त आय का सुझाव : अनुराग ठाकुर ने हिमाचल सरकार को अतिरिक्त आय जुटाने के लिए जीएसटी व्यवस्था को मजबूत करने और डिजिटल एकीकरण बढ़ाने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र अनुमानों के अनुसार इन उपायों से हर साल 250 से 350 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय जुटाई जा सकती है। उन्होंने मुख्यमंत्री से लॉटरी टैंडर को रद्द करने और हिमाचल में लंबे समय से चली आ रही लॉटरी विरोधी सहमति को बनाए रखने का आग्रह किया। अनुराग ठाकुर ने कहा कि राज्य की वित्तीय चुनौतियों का समाधान जिम्मेदार और टिकाऊ वित्तीय सुधारों के जरिए किया जाना चाहिए।