शिमला जिले में अब तक 99 समितियों ई-पैक्स के रूप मे

शिमला की 23 पैक्स समितियां होंगी डिजिटल, किसानों को मिलेंगी डिजिटल सेवाएं

शिमला, (हि.स.) शिमला जिले की 23 प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों को कंप्यूटरीकरण परियोजना के तीसरे चरण के लिए राज्य स्तरीय कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति को भेजने की सिफारिश की गई है। यह निर्णय शुक्रवार को उपायुक्त एवं जिला स्तरीय कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने की।बैठक में केंद्र सरकार की उस परियोजना की समीक्षा की गई, जिसके तहत देशभर की प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य पैक्स को आधुनिक डिजिटल व्यवस्था से जोड़ना और उनकी कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा प्रभावी बनाना है। परियोजना के तहत समितियों को हार्डवेयर, ईआरपी सॉफ्टवेयर, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, रखरखाव और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बैठक में बताया गया कि शिमला जिले में कुल 200 प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियां पंजीकृत हैं। इनमें से 49 समितियां वर्तमान में निष्क्रिय हैं।

         इससे पहले जिला स्तरीय समिति 99 समितियों को कंप्यूटरीकरण के लिए मंजूरी दे चुकी है। इनमें 30 समितियां पहले चरण और 69 समितियां दूसरे चरण में शामिल की गई थीं। इन 99 में से 96 समितियां अब ई-पैक्स के रूप में विकसित हो चुकी हैं और उन्हें हैंडओवर प्रमाण पत्र भी जारी किए जा चुके हैं। सहायक पंजीयक, सहकारी समितियां शिमला और जुब्बल की ओर से प्रस्तुत प्रस्तावों पर विचार करने के बाद समिति ने 23 पात्र पैक्स और एम-पैक्स को कंप्यूटरीकरण के तीसरे चरण के लिए राज्य स्तरीय कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति को अनुशंसित करने का निर्णय लिया। इनमें शिमला क्षेत्र से 12 और जुब्बल क्षेत्र से 11 पैक्स एवं एम-पैक्स शामिल हैं। इसके अलावा नवगठित चार एम-पैक्स के प्रस्तावों को आगामी चरण में विचार के लिए शामिल किया जाएगा। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बैठक में कहा कि प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण सहकारी क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इससे समितियों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं को आधुनिक, तेज और बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।