एक दिन पहले किया था नामांकन, फरवरी में बांग्लादेश

देश में नयी राजनीतिक बयार देखने से पहले दुनिया से रुखसत हो गयीं बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: बांग्लादेश में वह नहीं हुआ जो 'इनसान' चाहता है, हुआ वही जो ऊपर बैठा पहले से ही तय कर चुका था. जी हां, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख बेगम खालिदा जिया न सिर्फ फरवरी महीने में होने वाले आम चुनाव की तैयारियों में जी-जान से जुटी हुई थीं, बल्कि चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर खड़ी होकर अपना नामांकन भी कर चुकी थी. खालिदा जिया ने एक दिन पहले यानी सोमवार को बोगुरा-7 सीट से चुनावी नामांकन दाखिल किया था. लेकिन विधाता उनके लिए यह नहीं चाहता था कि वह उनके देश में बदलने वाली राजनीतिक बयार को देख सकें और  का मंगलवार सुबह उन्हें अपने पास बुला लिया. लंबी बीमारी से जूझते हुए  80 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया. इसके साथ ही बांग्लादेश की राजनीति का एक अध्याय भी समाप्त हो गया.

खालिदा जिया बांग्लादेश की उन राजनेताओं में थी, जिन्होंने दशकों तक देश की राष्ट्रीय राजनीति को दिशा दी थी. खालिदा जिया की राजनीतिक दिशा 1960 में तब बदली थी जब महज 15 साल की उम्र में उनका निकाह बांग्लादेश के सैन्य अधिकारी जिया-उर-रहमान से हुआ था. जिया-उर-रहमान 1977 में बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने थे. खालिदा जिया का राजनीतिक सफर की शुरुआत पति जियाउर रहमान की हत्या के बाद हुई. 1981 में सैन्य तख्तापलट के दौरान रहमान की हत्या कर दी गई थी. यहीं से खालिदा जिया का राजनीतिक सफर शुरू हुआ. पहले तो उन्होंने  1977 से 1981 तक बांग्लादेश के राष्ट्रपति का पद सम्भालान, फिर 1978 में BNP की स्थापना की. फिर जल्द ही देश की ताकतवर नेताओं में वह शुमार हो गईं।

1991 में खालिदा जिया बनीं बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री

खालिदा जिया की राजनीतिक सफलता का बड़ा मुकाम तब आया जब 1991 में वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमत्री बन गयीं. बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली के बाद जब चुनाव हुए तब खालिदा की पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बन बैठीं. उसके बाद वे 1996 और 2001 में भी देश की प्रधानमंत्री रहीं. 

खालिदा जिया का शासन काल भारत और बांग्लादेश के बीच अविश्वास भरे संबंधों का काल रहा है. चूंकि खालिदा पाकिस्तान समर्थक थीं इसलिए भारत के साथ संबंधों में विश्वास की रेखा नहीं खिंच पायी. खालिदा जिया के शासन काल मेंपूर्वोत्तर भारत में घुसपैठ के साथ उग्रवादी घटनाएं भी खूब हुईं,. 

खालिदा जिया के राजनीतिक पतन का दौर

  • चूंकि राजनीति और विवादों का गहरा नाता होता है तो इससे खालिदा जिया भी बच नहीं पायीं. यह निर्विवाद रूप से सच है कि उनके कार्यकाल में देश अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे में काफी विकास हुआ, लेकिन उनकी सरकार पर न सिर्फ भ्रष्टाचार, बल्कि राजनीतिक हिंसा और कट्टरपंथी तत्वों को बढ़ावा देने के आरोप भी लगे. यहां से उनकी लोकप्रियता में कमी भी आनी शुरू हुई जिसका लाभ उनकी प्रमुख प्रतिद्वन्द्वी शेख हसीना ने उठाया. इसके बाद बांग्लादेश की राजनीति धुरी में ये ही दो महिला नेता ही नजर आयीं.
  • खालिदा जिया ने बांग्लादेश की राजनीति में जितना चढ़ाव देखा, उतन ही ढलाव भी उनकी राजनीतिक जिंदगी में आया. राजनीतिक विरोधों के कारण खालिदा को 2006 में इस्तीफा देना पड़ा. इसके बाद देश में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया.
  • 2008 में हुए आम चुनावों में आवामी लीग की शानदार जीत दर्ज ने खालिदा जिया को बड़ा राजनीतिक झटका दिया क्योंकि अब शेख हसीना पहली बार देश की प्रधानमंत्री बन गयी थीं.
  • शेख हसीना की सरकार में खालिदा पर भ्रष्टाचार से जुड़े 32 मुकदमे दर्ज किए गए. जो खालिदा की परेशानियां बढ़ाने वाले थे. 
  • खालिदा को साल 2018 में भ्रष्टाचार के ही आरोपों में जेल भेजा गया. 

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