सुप्रीम कोर्ट प्रचारकारियों के खिलाफ कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने प्रचारकारों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ी मामलों में सख्त दिशानिर्देश दिए। राज्यों को नाबालिगों की तुरंत रिहा करें।

By : Just Click National , Sukhwinder Kaur

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाई

नई दिल्ली, (हि.स.) उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि कि वे नाबालिगों को तुरंत रिहा करें। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि उन्हें सुरक्षा नहीं मिलेगी, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन, बॉडी कैमरे, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड और पीसीआर कॉल को संरक्षित रखे जाएं। कोर्ट ने सभी राज्यों की पुलिस को निर्देश दिया कि वो प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के डिजिटल डाटा को संरक्षित करें और उसे सार्वजनिक नहीं करें। कोर्ट ने ये भी आदेश दिया कि प्रदर्शनकारियों के किसी भी निजी जानकारी और सूचना को प्रकाशित नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार 18 साल से कम के नाबालिगों को तुरंत रिहा किया जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शनाकारियों से निपटने के लिए लाठीचार्ज, पेलेट गन और आंसू गैस छोड़े गए। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए रबड़ के गोले और इलेक्ट्रिक बैटन का इस्तेमाल किया गया। कोर्ट ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता इस मामले में स्वतंत्र जांच का विरोध नहीं कर रहे हैं। मेहता ने कहा कि इस प्रदर्शन के दौरान कई अपराधी भी मौजूद थे जिन्होंने करीब दो सौ पुलिसकर्मियों को घायल किया। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष जांच जरुरी है। ये जांच पुलिसकर्मियों के परिजनों की चिंता पर भी गौर करेगा। कमेटी गठित करने के पहले केंद्र सरकार अपना जवाब दाखिल करे।