चंडीगढ़, 18 अगस्त (जस्ट क्लिक) : तुलसीदास जी के नाम से हम परिचित हैं। श्रीराम जी की कथा लिखने वाले संत वाल्मीकि, जिन्होंने त्रेतायुग में इसे संस्कृत में लिखा था, उसी रामायण को इस कलियुग के अंदर आज से 400 साल पहले तुलसीदास जी ने फिर से ज़िंदा किया। तुलसीदास जी ने अपने अंदर भक्ति से श्रीराम को प्रकट कियाऔर फिर से 'रामचरित्रमानस' संसार को दी उनकी काम वासना से राम वासना जग गई और श्रीराम को प्रकट कर दिया। 'हनुमान चालीसा' भी संसार को तुलसीदास जी ने दिया है। भक्ति के अंदर श्रीराम के मार्ग पर चलते हुए जब उनके अंदर श्रीराम प्रकट हुए तो उन्होंने संसार को कहा कि श्रीराम के दास बन जाओ। तभी नाम भी रखा गया तुलसी ‘दास’। जो श्रीराम का दास है, वह सिर्फ भक्ति में नहाता है। संसार से मोतियों की मालाएं नहीं मांगता, भीख नहीं मांगता। श्वास-श्वास में हो सिमरन ‘श्रीराम ’का और उस ‘श्रीराम ’को प्रकट किया हनुमान जी ने। तुलसीदास जी ने 'हनुमान चालीसा' संसार को बताई कि तुम्हें हनुमान होना है, क्योंकि जिंदा श्रीराम तो तभी आएंगे जब तुम्हारी हर सांस में श्रीराम होंगे। जब संसार की कोई कंचन, कीर्ति, कामिनी, किसी में इच्छा न हो, तब मनुष्य अंदर से खाली हो जाता है। 'तुलसी भरोसे श्रीराम के, निर्भय होकर सोए; अनहोनी होनी नहीं, होनी हो सो होए।' प्यारे तुलसीदास जी इस दोहे में बता रहे हैं कि 'तुलसी भरोसे श्रीराम के'। तुलसीदास जी ने कहा कि मेरा भरोसा श्रीराम हैं, अब और कोई नहीं बचा; अब जीवन में जो कुछ भी है, श्रीराम हैं। श्रीराम ही हैं सब कुछ करने वाले। श्रीराम केवल धनुष-बाण वाले श्रीराम नहीं, बल्कि सत्' का साक्षात स्वरूप हैं- ‘श्रीराम नाम सत् है!’ सत् यानी जिसके अंदर माया नहीं है, जिसके अंदर पूरा खालीपन है, वही है तुम्हारा श्रीराम। जैसे इस संसार के अंदर हनुमान जी के लिए श्रीराम हुए, या जैसे तुलसीदास जी अपने गुरु नरहरिदास के हनुमान बने, वैसे ही उन्होंने कहा कि मेरा भरोसा अब किसी पर नहीं, सिर्फ मेरे प्रभु प्यारे पर है। 'तुलसी भरोसे श्रीराम के', तुम कब कहोगे? तुम हनुमान कब बनोगे? कब श्रीराम को प्रकट करोगे? श्रीराम तो सदा तैयार हैं आने के लिए, लेकिन तुम अंदर से खाली नहीं हो। तुम्हारी भक्ति पूर्ण नहीं हो रही है; अपनी भक्ति जगाओ, यदि तुम खाली हो जाओ तो श्रीराम दौड़े-दौड़े आएंगे! इसीलिए कहा गया है, 'तुलसी भरोसे श्रीराम के, निर्भय होकर सोए'। जिसने सब श्रीराम के भरोसे कर दिया, वे निश्चिंत होकर सो जाते हैं। अब जो तुम्हें अच्छा लगे वो करो, क्योंकि अनहोनी होनी नहीं, होनी हो सो होए अगर मौत लिखी है, तो आएगी ! जो होना है, वह होने ही वाला है। यदि दिवाला पीटना है तो दिवाला पीटेगा; बर्बादी होनी है तो बर्बादी होगी; मौत लिखी है तो मौत आएगी। क्यों? क्योंकि ये तुम्हारे संचित कर्म हैं। इसलिए जागो प्यारो, जागो! सिर्फ रामायण पढ़ने से कुछ न होगा, अगर रामायण के श्रीराम जीवन में न उतरे। यदि तुम काम में ही फँसे रह गए, वासनाओं में अटके रह गए और संसार के मोतियों को ही चुनते रह गए, तो फिर श्रीराम न आएंगे। जिंदा श्रीराम को ज़िंदगी में लाना पड़ेगा । तुलसीदास जी जिंदा श्रीराम को लेकर आए और संसार को 'श्रीराम चरित्रमानस' दी। कब तुम अपने अंदर श्रीराम को प्रकट करोगे? क्योंकि जो अंदर से हनुमान हो गया, उसी में श्रीराम आएंगे। हनुमान जी अंदर से खाली हो गए थे; उनके अंदर से कंचन-कीर्ति-कामिनी गायब हो गई थी। जिसके अंदर से काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार गायब हो गया, वही हनुमान है और उन्ही में श्रीराम आकर बसते हैं जिनकी हर सांस में सिर्फ एक ही चलता है, इसलिए जागो। अगर श्रीराम को जीवन में नहीं लाए और संसार के कामों में ही फंसे रहे, तो अंत समय में पछताना होगा और कुछ ना होगा। तुलसीदास जी ने जो वचन दिए तुम्हारे लिए, वह उनके हृदय के भाव थे ताकि तुम अपने अंदर हनुमान जी को प्रकट कर सको, भक्ति को जगा सको और श्रीराम जी को लाकर तुम इस संसार से मुक्त हो सको। तभी ये जन्म सफल होगा।