अम्बिकापुर, 26 अगस्त (हि.स.) : सरगुजा जिले के सीतापुर में दशकों से जनपद पंचायत के पुराने भवन में चल रहे व्यवहार न्यायालय को अपना नया परिसर मिलने से पहले ही निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम चलता में लोक निर्माण विभाग की देखरेख में लगभग 7.5 करोड़ रुपए की लागत से तैयार व्यवहार न्यायालय का नया भवन उद्घाटन से पहले ही दरारों और खामियों की चपेट में आ गया है। करीब दो साल पहले बनकर तैयार हुए इस विशाल परिसर को तकनीकी खामियों और सीपेज के चलते न्यायालय प्रशासन ने हैंडओवर लेने से इंकार कर दिया था। स्थानीय अधिवक्ताओं के कड़े विरोध और शिकायतों के बाद विभाग ने मरम्मत कराकर सीपेज तो किसी तरह रोक दिया, लेकिन दीवारों और संरचना में उभरी दरारें अब भी साफ नजर आ रही हैं। विभाग द्वारा की गई पुट्टी और रंग-रोगन की लीपापोती के बावजूद दरारें बार-बार उभर रही हैं, जो निर्माण सामग्री व तकनीक में बरती गई लापरवाही की ओर इशारा करती हैं। अधिवक्ता देवेंद्र गुप्ता के अनुसार भवन में सिर्फ दरारें और सीपेज ही नहीं, बल्कि न्यायालयीन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए आवश्यक ऑनलाइन तकनीकी व्यवस्थाएं भी अधूरी थीं। इसी वजह से न्यायालय प्रशासन इसे हैंडओवर लेने से बचता रहा। उन्होंने बताया कि सुधार कार्यों की रिपोर्ट और उच्च न्यायालय से प्रोटोकॉल व दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही औपचारिक उद्घाटन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। दूसरी ओर लोक निर्माण विभाग के उप-अभियंता अमित टोप्पो ने गुणवत्ता की खामियों को खारिज करते हुए तर्क दिया कि भवन अढ़ाई साल पहले ही बन चुका था और हैंडओवर न होने के कारण देखरेख के अभाव में ऐसी स्थिति बनी है। उन्होंने दरारों को केवल पुट्टी का उखड़ना बताते हुए कहा कि अगले पांच वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की है और जहां भी खराबी है, उसे ठीक करवाया जाएगा। हालांकि करोड़ों के इस प्रोजैक्ट की मौजूदा स्थिति ने प्रशासनिक निगरानी और सार्वजनिक धन के उपयोग पर कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
उद्घाटन से पहले ही 7.5 करोड़ से नवनिर्मित न्यायालय भवन में पड़ी दरारें
करोड़ों के इस प्रोजैक्ट की मौजूदा स्थिति ने प्रशासनिक निगरानी और सार्वजनिक धन के उपयोग पर कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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