मधेपुरा रेल इंजन फैक्टरी के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूटा

योग्यता के आधार पर नौकरी दो वर्ना फैक्टरी बंद करो

मधेपुरा रेल इंजन फैक्टरी के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूटा

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि यहां रेल इंजन के निर्माण के नाम पर बाहर से सामान लाकर सिर्फ असैंबलिंग की जाती है।

मधेपुरा रेल इंजन फैक्टरी के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूटा

मधेपुरा, 6 सितंबर (हि.स.) : बिहार के मधेपुरा की रेल इंजन फैक्टरी को लेकर आसपास के ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। स्थानीय लोगों ने फैक्टरी प्रबंधन पर रोजगार के मामले में अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर फैक्टरी खड़ी है, उसका लाभ स्थानीय लोगों को भी मिलना चाहिए। उनकी मांग है कि योग्यता के अनुसार फैक्टरी में नौकरी दो, स्थानीय युवाओं को रोजगार दो, नहीं तो फैक्टरी बंद करो। दरअसल हाल ही में अलस्टॉम और भारतीय रेलवे की संयुक्त कंपनी एमईएलपीएल की एक रिपोर्ट पटना में जारी की गई। रिपोर्ट के मुताबिक मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव परियोजना ने वित्तीय वर्ष 2020-26 के दौरान देशभर में करीब 60 हजार करोड़ रुपए के आर्थिक आउटपुट को सपोर्ट किया है। रिपोर्ट और मीडिया में स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने की बात सामने आने के बाद फैक्टरी के आसपास के गांवों में नाराजगी और बढ़ गई। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्टरी में स्थानीय युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि यहां रेल इंजन के निर्माण के नाम पर बाहर से सामान लाकर सिर्फ असेंबलिंग की जाती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीण अरविंद कुमार यादव ने फैक्टरी के एक अधिकारी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी गांव के युवाओं से कथित तौर पर स्मैक बिकवा रहे हैं और इससे समाज बर्बाद हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बच्चों ने आईटीआई की पढ़ाई की, लेकिन इसके बावजूद उन्हें योग्यता के मुताबिक रोजगार नहीं मिला। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सुधीर कुमार यादव ने कहा कि रोजगार के साथ-साथ बिजली, शिक्षा और किसानों की सुविधाओं को लेकर भी ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि जमीन लेते समय स्थानीय विकास और रोजगार का भरोसा दिया गया था, लेकिन आज भी गांव के कई युवा बाहर कमाने को मजबूर हैं। फिलहाल ग्रामीणों ने आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे एक बार फिर बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। वही इस संबंध में फैक्ट्री प्रबंधन ने किसी भी प्रकार का बयान देने से परहेज किया।

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