महुआ मोइत्रा की गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 7 सितंबर तक टली

कलकत्ता उच्च न्यायालय में विचाराधीन कार्यवाही

महुआ मोइत्रा की गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 7 सितंबर तक टली

उच्च न्यायालय ने 24 अगस्त को मोइत्रा के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा दी थी।

महुआ मोइत्रा की गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 7 सितंबर तक टली

कोलकाता, 02 सितंबर (हि. स.) : कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर सुनवाई सात सितंबर तक टाल दी, जिसमें नदिया जिले के कृष्णनगर की अदालत से जारी गिरफ्तारी वारंट की वैधता को चुनौती दी गई है। उच्च न्यायालय ने 24 अगस्त को मोइत्रा के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा दी थी। यह वारंट मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष पेश होने के निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण जारी किया गया था। न्यायमूर्ति देबांग्शु बसाक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बुधवार को मोइत्रा की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति आर्यक दत्त भी शामिल थे। दोनों पक्षों की ओर से सुनवाई टालने का अनुरोध किए जाने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई सात सितंबर को तय की। यह मामला नदिया जिले की अदालत में दर्ज शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कृष्णनगर की सांसद महुआ मोइत्रा ने महिलाओं का अपमान किया और घृणास्पद भाषण दिया। इस मामले में कृष्णनगर अदालत ने उन्हें अदालत में पेश होने के लिए समन जारी किया था। मोइत्रा के अधिवक्ता अरको कुमार नाग ने अदालत में दलील दी कि शिकायत में जिन भाषणों की तारीखों का उल्लेख है और जिस समय मामला दर्ज किया गया, उस दौरान मोइत्रा सांसद थीं। इसलिए इस मामले की सुनवाई सांसदों और विधायकों के लिए निर्धारित विशेष अदालत में होनी चाहिए। उन्होंने यह भी दलील दी कि मोइत्रा के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार और तुच्छ हैं तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों को आपराधिक अपराध नहीं माना जा सकता। कृष्णनगर की तृतीय न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने बार-बार समन जारी होने के बावजूद मोइत्रा के पेश नहीं होने का उल्लेख करते हुए 19 अगस्त को उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया था।

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