ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाई जाएगी : मदन कौशिक

आपदा मंत्री ने एसईओसी से ली विस्तृत जानकारी

ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाई जाएगी : मदन कौशिक

मंत्री ने संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में रियल टाइम मॉनीटरिंग और पूर्व चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाई जाएगी  मदन कौशिक

देहरादून, 30 अगस्त (हि.स.) : उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों से संभावित खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने ग्लेशियर झीलों की निगरानी और जोखिम न्यूनीकरण के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाने के निर्देश दिए हैं। मंत्री मदन कौशिक रविवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) पहुंचकर प्रदेश में स्थित ग्लेशियर झीलों की स्थिति और संभावित जोखिम की विस्तृत जानकारी ली। कौशिक ने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए ग्लेशियर और ग्लेशियर झीलों में होने वाले बदलावों की वैज्ञानिक निगरानी जरूरी है। उन्होंने ग्लेशियर झीलों के जलस्तर, आकार और जलभराव की स्थिति की निरंतर एवं रियल टाइम मॉनीटरिंग के लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और सेंसर आधारित निगरानी समेत आधुनिक तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित विभागों, विशेषज्ञ संस्थानों और तकनीकी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने को कहा। इससे असामान्य स्थिति का समय रहते पता लगाकर संभावित प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहले से सतर्क किया जा सकेगा। आपदा प्रबंधन मंत्री ने प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और उससे उत्पन्न परिस्थितियों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जनजीवन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी विभाग पूर्ण समन्वय के साथ 24×7 अलर्ट मोड पर कार्य करें। कौशिक ने कहा कि मौसम की वास्तविक स्थिति और मार्ग की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही यात्रा का संचालन किया जाए। अत्यधिक बारिश या मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और परिस्थितियां सामान्य होने के बाद ही उन्हें आगे भेजा जाए। उन्होंने नदियों के जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने और नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को लगातार जागरूक करने के निर्देश दिए। डैम और बैराज से पानी छोड़े जाने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों के लोगों को पूर्व सूचना देकर सतर्क करने तथा आवश्यकता पड़ने पर सीमावर्ती राज्यों को भी समय रहते अलर्ट करने को कहा। बैठक में राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला, उपाध्यक्ष ले. कर्नल (अ.प्रा.) रघुवीर सिंह भंडारी, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा सहित यूएसडीएमए के विशेषज्ञ और अधिकारी मौजूद रहे।

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