जींद : देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में बैठकर स्कूली बच्चे हुए उत्साहित

जींद में हाइड्रोजन ट्रेन ने रचा इतिहास

जींद : देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में बैठकर स्कूली बच्चे हुए उत्साहित

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन पर सवारी करते हुए बच्चों में उत्साह की लहर दौड़ गई। जींद के स्कूलों में कई छात्रों ने इस अनोखे अनुभव से वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा दिया, जो प्रदूषण रहित और शांत चलती है।

जींद  देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में बैठकर स्कूली बच्चे हुए उत्साहित

जींद,  (हि.स.) देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में सवारी का सपना साकार होते ही जींद के बच्चों में उत्साह की लहर दौड़ गई। शुक्रवार सुबह से ही शहर के सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चे रेलवे जंक्शन पहुंचने लगे। नीली यूनिफॉर्म और बैग लहराते बच्चे प्लेटफार्म पर खड़े होकर हाइड्रोजन ट्रेन को देख रहे थे। ट्रेन के आगमन से पहले ही जंक्शन पर चहल-पहल छा गई थी। रेलवे प्रशासन द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में हजारों बच्चे शामिल हुए, जिन्होंने ट्रेन में बैठ कर अनोखा अनुभव प्राप्त किया। बच्चों ने कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल हाइड्रोजन ईंधन पर चलती है, जो डीजल या बिजली वाली ट्रेनों से पूरी तरह अलग है। इसमें शून्य कार्बन उत्सर्जन का वादा है। बच्चों के लिए यह न सिर्फ रोमांच का विषय था बल्कि भविष्य की तकनीक का जीवंत उदाहरण भी रहा।

             जंक्शन पर पहुंचते ही बच्चे ट्रेन के बाहरी स्वरूप, आधुनिक सीटों, डिस्प्ले स्क्रीन्स और शांत इंजन की सराहना करते नजर आए। वहीं जंक्शन पर मौजूद शिक्षकों ने बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन में बैठने से बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा बढ़ी है। कई बच्चे ट्रेन की स्पीड, ईंधन की बचत और पर्यावरण प्रभाव पर सवाल पूछते रहे। इस अनोखे अनुभव ने जींद के बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी। हाइड्रोजन ट्रेन अब उनके सपनों और चर्चाओं का केंद्र बन गई। इंडस स्कूल के दसवीं कक्षा के छात्र आयुष ने कहा कि वो हाइड्रोजन ट्रेन को देखने के लिए बहुत उत्सुक थे। अबतक उन्होंने हाइड्रोजन ट्रेन के बारे में सुना था। शुक्रवार को उन्हें ट्रेन में बैठने का मौका मिला है। ट्रेन से बिल्कुल धुआं नही निकलता है और जब यह चलती है तो बिल्कुल शांत और साफ है। जैसे उड़ान भर रही हो। हाइड्रोजन ट्रेन में बैठकर लगा कि मैं किसी प्लेन में बैठा हूं। इंडस स्कूल के दसवीं कक्षा के छात्र शौर्य ने कहा कि देश की पहली हाइड्रोन टेन में पहले दिन ही बैठना अपने आप में गर्व की बात है। हाइड्रोजन ट्रेन की सीटें नरम हैं और खिड़कियां बड़ी-बड़ी। बाहर का नजारा देखते हुए लगा कि ट्रेन हवा में चल रही है। ये ट्रेन प्रदूषण नहीं फैलाती, मेरा शहर साफ रहेगा।

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