शिमला, 17 अगस्त (हि.स.) : हिमाचल प्रदेश के दो प्रमुख सरकारी मैडीकल कॉलेजों टांडा और नेरचौक में अब पी.ई.टी. (पैट) स्कैन की सुविधा उपलब्ध करवाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने इन दोनों संस्थानों के लिए 50 करोड़ रुपए की लागत से पी.ई.टी. स्कैन मशीनें स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के लिए करीब 300 करोड़ रुपए के चिकित्सा उपकरणों और मशीनरी की खरीद तथा स्थापना का काम भी तेज किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश मैडीकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी प्रक्रियाएं तय समय के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएं, जिससे लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ जल्द मिल सके। बैठक में मुख्यमंत्री ने चिकित्सा महाविद्यालयों में इस वर्ष के अंत तक ऑटोमेटेड लैबोरेटरी सिस्टम स्थापित करने के भी निर्देश दिए। सरकार का मानना है कि इससे जांच सेवाओं की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार होगा। सरकार के अनुसार कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए निविदाएं पहले ही जारी की जा चुकी हैं। इनमें मैडीकल कॉलेजों के लिए 75 करोड़ रुपए की लागत से ट्रैक आधारित इंटीग्रेटेड टोटल लैब ऑटोमेशन सिस्टम शामिल है। वहीं अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशियलिटी चमियाना के लिए दो करोड़ रुपये की उच्च क्षमता वाली इकोकार्डियोग्राफी मशीनों की खरीद की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। चंबा मैडीकल कॉलेज के लिए 13 फुल डिजिटल रेडियोग्राफी मशीनों, मैमोग्राफी और अन्य उपकरणों की खरीद की जा रही है। हमीरपुर मैडीकल कॉलेज में तीन करोड़ रुपये की ब्लड कंपोनैंट सैप्ररेटर यूनिट स्थापित होगी। आई.जी.एम.सी. शिमला के लिए पांच करोड़ रुपए के 4के लैप्रोस्कोपिक सर्जरी सेट और इलैक्ट्रोसर्जिकल स्टेशन खरीदे जाएंगे। इसके अलावा ब्लॉक पब्लिक हैल्थ यूनिट्स, आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों तथा अन्य अस्पतालों के लिए भी बड़ी मात्रा में उपकरण, दवाइयां और सर्जिकल सामग्री खरीदी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि दूसरे चरण में करीब 83 करोड़ रुपए की अतिरिक्त चिकित्सा मशीनरी और उपकरणों की खरीद के लिए भी निविदाएं जारी की जाएंगी। इसके तहत टांडा मैडीकल कॉलेज और अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मैडीकल सुपरस्पैशियलिटी चमियाना में 30 करोड़ रुपए की लागत से बाइप्लेन डी.एस.ए. मशीनें स्थापित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।