नई दिल्ली, 02 अक्टूबर (हि.स.) : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने के बावजूद भारतीय नागरिक होने का दावा कर सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे में नौकरी करने और सरकारी कोष से वेतन-पेंशन लेने के मामले में 53.46 लाख रुपये की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है। कुर्क की गई संपत्ति उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के खलीलाबाद में 189.75 वर्ग मीटर का आवासीय भूखंड है, जो शम्सुल हुडा खान के नाम पर पंजीकृत है। ईडी ने बताया कि लखनऊ क्षेत्रीय इकाई ने पीएमएलए, 2002 के तहत यह कार्रवाई की है। जांच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज विभिन्न प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी। एजेंसी के अनुसार, शम्सुल हुडा खान ने 19 दिसंबर 2013 को ब्रिटेन की नागरिकता हासिल की थी, जिसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो गई थी। आरोप है कि उन्होंने यह तथ्य छिपाए रखा और समर्पित भारतीय पासपोर्ट के साथ पैन कार्ड, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र का इस्तेमाल कर संपत्तियां खरीदीं। जांच में सामने आया कि ब्रिटिश नागरिक बनने के बाद भी खान आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत रहे। ईडी के अनुसार, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग की जांच में वर्ष 2007 से 2017 तक उनकी सेवा का सत्यापन नहीं हुआ था। इसके बावजूद वर्ष 2017 में उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दी गई और नियमित पेंशन भी स्वीकृत कर दी गई। एजेंसी ने बताया कि राज्य सरकार के खजाने से वेतन, पेंशन और सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) के रूप में कुल 53.46 लाख रुपये उनके बैंक खाते में जमा हुए। ईडी ने इस राशि को अपराध से अर्जित आय बताया है। मूल धनराशि का इस्तेमाल हो जाने के कारण उसके बराबर मूल्य की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की गई है। ईडी ने इस मामले में 11 फरवरी 2026 को दो परिसरों में तलाशी भी ली थी। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों को जांच में शामिल किया गया है। एजेंसी ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है और धन के प्रवाह तथा अन्य संभावित लाभार्थियों की भूमिका की जांच की जा रही है।