न्यूनतम मजदूरी और सेवा सुरक्षा की मांग

शिमला में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

प्रदर्शन के बाद यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने एनएचएम प्रबंध निदेशक के ओएसडी डॉ. चेतन चौहान से मुलाकात कर मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा

By : Just Click National , Sukhwinder Kaur
शिमला में  108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

शिमला, 01 अक्टूबर (हि.स.) : 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर बुधवार को शिमला में नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक कार्यालय कुसुम्पटी के बाहर प्रदर्शन किया। 108 एवं 102 एंबुलेंस कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर हुए प्रदर्शन में सैकड़ों कर्मचारियों और श्रमिकों ने हिस्सा लिया। कर्मचारियों ने न्यूनतम मजदूरी, ओवरटाइम भुगतान, ईपीएफ-ईएसआई, वैधानिक छुट्टियों, साप्ताहिक अवकाश और सेवा सुरक्षा समेत कई मांगें उठाईं। प्रदर्शन के बाद यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने एनएचएम प्रबंध निदेशक के ओएसडी डॉ. चेतन चौहान से मुलाकात कर मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने एनएचएम प्रबंधन, मेडस्वान कंपनी और यूनियन के बीच त्रिपक्षीय बैठक बुलाकर लंबित मामलों का समाधान करने की मांग की। सीटू नेताओं और यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि 108 और 102 एंबुलेंस सेवाएं राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। पायलट, कैप्टन और ईएमटी कर्मचारी आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का काम करते हैं। यूनियन के मुताबिक कर्मचारियों के सामने लंबे समय से न्यूनतम मजदूरी, 12 घंटे की ड्यूटी के ओवरटाइम भुगतान, ईपीएफ-ईएसआई, वैधानिक छुट्टियों, साप्ताहिक अवकाश, वेतन कटौती और नौकरी की सुरक्षा से जुड़े मामले लंबित हैं। यूनियन नेताओं ने बताया कि 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं का संचालन जनवरी 2022 में जीवीके से मेडस्वान फाउंडेशन को स्थानांतरित हुआ था। उनका कहना है कि कंपनी बदलने के बावजूद कर्मचारियों की सेवा अवधि, वरिष्ठता और पिछली सेवा से जुड़े वैधानिक अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए। उन्होंने जीवीके अवधि की ग्रेच्युटी, छंटनी भत्ता, नोटिस पे और अन्य वैधानिक बकाया का भुगतान करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने वर्ष 2020 और 2026 के हाईकोर्ट के आदेशों, सीजेएम कोर्ट शिमला के आदेशों तथा लेबर कोर्ट और श्रम विभाग के संबंधित आदेशों को लागू करने की भी मांग की। उन्होंने सरकारी दर के अनुसार न्यूनतम मजदूरी, 12 घंटे की ड्यूटी के लिए नियमानुसार ओवरटाइम तथा ईपीएफ और ईएसआई का पूरा हिसाब देने की मांग रखी। इसके अलावा यूनियन ने वाहन मेंटेनेंस और बीमा के नाम पर वेतन कटौती रोकने, बीमारी के दौरान वेतन कटौती की प्रक्रिया बंद करने तथा गलत तरीके से स्थानांतरित, ऑफ-ड्यूटी, निलंबित या हटाए गए कर्मचारियों को बहाल करने की मांग की। कर्मचारियों ने ड्यूटी रोस्टर में मनमाने बदलाव, बेवजह नोटिस और यूनियन नेताओं व कर्मचारियों के कथित उत्पीड़न को रोकने की भी मांग उठाई।

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